रेलवे और एक्सप्रेस-वे की नजदीकी के कारण यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे भविष्य में उद्योगों के लिए यह क्षेत्र आकर्षक डेस्टिनेशन बन सकता है। सरकार आसपास की जमीन को भविष्य में भू-मालिकों से खरीदकर टाउनशिप का विस्तार करने पर भी विचार कर रही है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो औद्योगिक क्षेत्र का आकार बढ़ाया जा सकता है। टाउनशिप के विस्तार से छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ बड़े औद्योगिक निवेश के लिए भी अतिरिक्त जमीन उपलब्ध हो सकेगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार प्रदेश में नई इंडस्ट्रीयल टाउनशिप और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग टाउनशिप विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। आमतौर पर आईएमटी के लिए करीब 1500 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। इसके मुकाबले इंडस्ट्रीयल टाउनशिप को अपेक्षाकृत कम क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है। इसी वजह से चरखी दादरी की 200 एकड़ जमीन को इस मॉडल के लिए उपयुक्त माना गया है।
इस जमीन के इस्तेमाल को लेकर कवायद हालांकि नई नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल से ही बंद पड़ी सीमेंट फैक्टरी की जमीन पर रिहायशी कॉलोनी विकसित करने की योजना पर काम चल रहा था। इस प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय स्तर पर भी प्रयास किए गए थे। हालांकि जमीन के मौजूदा औद्योगिक भू-उपयोग और लैंड यूज बदलने में लगने वाले समय को देखते हुए अब सरकार ने औद्योगिक टाउनशिप का विकल्प चुना है। चरखी दादरी के विधायक सुनील सतपाल सांगवान ने मुख्यमंत्री के सामने इस जमीन पर इंडस्ट्रीयल टाउनशिप विकसित करने की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए अधिकारियों को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना की लागत, संभावित निवेश, आधारभूत ढांचे और टाउनशिप में विकसित की जाने वाली औद्योगिक गतिविधियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। माना जा रहा है कि परियोजना के सिरे चढ़ने पर चरखी दादरी में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।