फर्जी दस्तावेज से MBBS सीट हासिल करने का आरोप, देहरादून में चार छात्राओं के दाखिले रद्द

देहरादून:- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS में दाखिले के लिए जारी किए गए चार प्रमाणपत्र जांच के घेरे में आ गए हैं। जिला प्रशासन की जांच में दस्तावेजों में प्रथमदृष्टया गड़बड़ियां सामने आने और आवेदकों के दिए गए पतों का सत्यापन नहीं होने के बाद चारों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर हुए चार MBBS दाखिले भी रद्द कर दिए गए हैं। मामले में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ अलग-अलग थानों में FIR दर्ज की गई है।

एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम से जुड़े थे चारों प्रमाणपत्र

जांच में सामने आया कि चारों अभ्यर्थियों के आवेदन में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिचय पत्र लगाया गया था। हालांकि, जिला प्रशासन की संबंधित पंजिका में इस नाम का रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच टीम ने आवेदनों में दर्ज पतों का भी स्थलीय सत्यापन कराया। रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित पते पर अभ्यर्थियों या उनके परिवार के सदस्यों के रहने की पुष्टि नहीं हो सकी। कुछ मामलों में आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी दूसरे लोगों के पाए गए।

दस्तावेजों में भी मिलीं कई विसंगतियां

जांच के दौरान चारों आवेदनों में लगाए गए दस्तावेजों की भी पड़ताल की गई। रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए जरूरी दस्तावेजों में फोटो, पेंशन पट्टा, पहचान पत्र, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी का कार्ड शामिल थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि चारों आवेदनों में कुछ जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं थे। इसके अलावा कुछ शपथपत्रों में भी नाम और पारिवारिक विवरण से जुड़ी विसंगतियां पाई गईं।

अपूर्वा सिंह ने चार प्रमाणपत्र किए निरस्त

जांच के बाद तहसील प्रशासन ने चारों प्रमाणपत्रों को संदिग्ध मानते हुए निरस्त करने की संस्तुति की। इसके आधार पर एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह ने 10 सितंबर को चारों स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को भी भेजी गई। इसके बाद एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत हुए चारों MBBS दाखिले रद्द कर दिए।

चार छात्राओं समेत पांच लोगों पर मुकदमा

मामले में पुलिस ने दो थानों में प्राथमिकी दर्ज की है। क्लेमेंटाउन थाने में तृप्ति और उनकी मां उमा देवी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। पुलिस अब प्रमाणपत्र हासिल करने और आवेदन प्रक्रिया से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान के मुताबिक, शिकायत सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्तर की संयुक्त जांच समिति बनाई गई थी। समिति की रिपोर्ट में प्रमाणपत्रों को प्रथमदृष्टया संदिग्ध बताया गया और दस्तावेजों व पतों के सत्यापन में भी समस्या सामने आई। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

अब ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में

मामले की जांच अब केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। पुलिस ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। चूंकि आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज अपलोड करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई थी, इसलिए जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आवेदन किस स्तर से आगे बढ़े और प्रमाणपत्र जारी होने तक किन-किन चरणों से गुजरे। फिलहाल सामने आए चार मामलों में प्रमाणपत्र निरस्त हो चुके हैं, चारों MBBS दाखिले रद्द किए जा चुके हैं और पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है। अन्य संभावित मामलों में क्या कार्रवाई होती है, यह आगे की जांच और सत्यापन पर निर्भर करेगा।

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