राज्य के पहले ड्रोन पायलट प्रशिक्षण संस्थान का निरीक्षण करने के लिए डीजीसीए की टीम बृहस्पतिवार को देहरादून पहुंचेगी। टीम इस दौरान आईटी पार्क स्थित आईटीडीए जाएगी। वहीं, सचिव आईटी नितेश झा से मुलाकात करेगी। आईटीडीए की ओर से राज्य का पहला ड्रोन पायलट प्रशिक्षण संस्थान बनाया जा रहा है।
यहां से युवा ड्रोन संचालन का कोर्स कर सकेंगे। इसके लिए डीजीसीए से मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र मिलेंगे। ये प्रमाण पत्र पूरे देश में कहीं भी रोजगार, स्वरोजगार में काम आएगा। आईटीडीए की निदेशक एवं अपर सचिव आईटी नितिका खंडेलवाल ने बताया कि वैसे तो पहले से ही ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है लेकिन वे इसका कोई मान्य सर्टिफिकेट नहीं देते हैं।
डीजीसीए से मान्यता मिलने के बाद यहां के सर्टिफिकेट पूरे देश में मान्य होंगे। जो युवाओं के लिए बेहतर अवसर बनेगा।डीजीसीए की टीम यहां पहुंचकर ये देखेगी कि उनके मानकों के हिसाब से प्रशिक्षण संस्थान कितना बेहतर है। टीम इसमें कुछ बदलाव के सुझाव भी दे सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी साल से आईटीडीए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कर देगा।
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“डीजीसीए टीम ने देहरादून में ड्रोन पायलट प्रशिक्षण संस्थान का किया निरीक्षण, सचिव आईटी से मुलाकात”
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आईटीडीए बनाएगा अत्याधुनिक और सुरक्षित डाटा सेंटर, साइबर हमले के बाद की तैयारी
साइबर हमले के बाद सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के विशेषज्ञ फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। इस कड़ी में आईटीडीए ने खतरा भांपते हुए नौ विभागों की वेबसाइट बंद कर दी है। 13 वेबसाइटें विभागों ने खुद बंद की हुई हैं। अब इन सभी 22 वेबसाइटों की कोडिंग के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।
पिछले साल अक्तूबर में साइबर हमला होने के बाद आईटीडीए ने सभी वेबसाइट बंद कर दी थी। इसके बाद एक-एक कर सिक्योरिटी ऑडिट व अन्य सुरक्षा संबंधी मानक पूरे करने वाली वेबसाइटों को शुरू किया जा रहा है। 16 वेबसाइट ऐसी थी, जिनकी जरूरत नहीं थी। इस वजह से उन्हें हमेशा के लिए बंद किया गया। अब नौ वेबसाइट ऐसी ट्रेस हुई हैं जिनके माध्यम से वायरस का खतरा हो रहा है। इन्हें भी आईटीडीए विशेषज्ञों ने फिलहाल बंद कर दिया है। 13 विभागों की वेबसाइट साइबर हमले के बाद से बंद हैं, जिनकी कोडिंग या सिक्योरिटी सिस्टम संबंधी मानक पूरे नहीं हैं।
कुल मिलाकर 22 वेबसाइटों को दोबारा शुरू करने से पहले अब आईटीडीए ने आईटीआई लिमिटेड, टीसीआईएल समेत कई सरकारी कंपनियों के विशेषज्ञों को बुलाया है। ये सभी मिलकर इन बंद पड़ी वेबसाइटों की कोडिंग करेंगे। इसके बाद इनका संचालन शुरू होगा।
डिजास्टर रिकवरी सेंटर के लिए जल्द होगा चयन
प्रदेश के डाटा की सुरक्षा के लिए दूसरे भौगोलिक राज्य में डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा। सचिव आईटी नितेश झा ने बताया कि डीआर सेंटर के लिए केंद्र सरकार ने 21 एजेंसी को सूचीबद्ध किया है। इनमें से जिसकी सेवाएं और खर्च सही होगा, उसे ये काम सौंपा जाएगा। डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनने के बाद राज्य के डाटा की एक कॉपी वहां भी सुरक्षित होगी। इसका मकसद ये है कि राज्य में कोई बड़ी आपदा जैसी स्थिति में अगर डाटा सेंटर क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल डीआर से वेबसाइटों का संचालन शुरू किया जा सके। इसी वजह से ये सेंटर किसी दूरस्थ राज्य में बनाया जाता है।आईटीडीए बनाएगा मजबूत, सुरक्षित डाटा सेंटर
जिस डाटा सेंटर पर साइबर हमला हुआ था, वह भविष्य में सॉफ्टवेयर विकसित करने जैसे ट्रायल में काम आएगा। अब आईटी पार्क स्थित आईटीडीए के बराबर में नई इमारत बनाई जा रही है। यह आईटीडीए का नया डाटा सेंटर होगा। यह अत्याधुनिक और ज्यादा सुरक्षित होगा।
साइबर हमले के बाद सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के विशेषज्ञ फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। इस कड़ी में आईटीडीए ने खतरा भांपते हुए नौ विभागों की वेबसाइट बंद कर दी है। 13 वेबसाइटें विभागों ने खुद बंद की हुई हैं। अब इन सभी 22 वेबसाइटों की कोडिंग के लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।
पिछले साल अक्तूबर में साइबर हमला होने के बाद आईटीडीए ने सभी वेबसाइट बंद कर दी थी। इसके बाद एक-एक कर सिक्योरिटी ऑडिट व अन्य सुरक्षा संबंधी मानक पूरे करने वाली वेबसाइटों को शुरू किया जा रहा है। 16 वेबसाइट ऐसी थी, जिनकी जरूरत नहीं थी। इस वजह से उन्हें हमेशा के लिए बंद किया गया। अब नौ वेबसाइट ऐसी ट्रेस हुई हैं जिनके माध्यम से वायरस का खतरा हो रहा है। इन्हें भी आईटीडीए विशेषज्ञों ने फिलहाल बंद कर दिया है। 13 विभागों की वेबसाइट साइबर हमले के बाद से बंद हैं, जिनकी कोडिंग या सिक्योरिटी सिस्टम संबंधी मानक पूरे नहीं हैं।
कुल मिलाकर 22 वेबसाइटों को दोबारा शुरू करने से पहले अब आईटीडीए ने आईटीआई लिमिटेड, टीसीआईएल समेत कई सरकारी कंपनियों के विशेषज्ञों को बुलाया है। ये सभी मिलकर इन बंद पड़ी वेबसाइटों की कोडिंग करेंगे। इसके बाद इनका संचालन शुरू होगा।
डिजास्टर रिकवरी सेंटर के लिए जल्द होगा चयन
प्रदेश के डाटा की सुरक्षा के लिए दूसरे भौगोलिक राज्य में डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा। सचिव आईटी नितेश झा ने बताया कि डीआर सेंटर के लिए केंद्र सरकार ने 21 एजेंसी को सूचीबद्ध किया है। इनमें से जिसकी सेवाएं और खर्च सही होगा, उसे ये काम सौंपा जाएगा। डिजास्टर रिकवरी सेंटर बनने के बाद राज्य के डाटा की एक कॉपी वहां भी सुरक्षित होगी। इसका मकसद ये है कि राज्य में कोई बड़ी आपदा जैसी स्थिति में अगर डाटा सेंटर क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल डीआर से वेबसाइटों का संचालन शुरू किया जा सके। इसी वजह से ये सेंटर किसी दूरस्थ राज्य में बनाया जाता है।आईटीडीए बनाएगा मजबूत, सुरक्षित डाटा सेंटर
जिस डाटा सेंटर पर साइबर हमला हुआ था, वह भविष्य में सॉफ्टवेयर विकसित करने जैसे ट्रायल में काम आएगा। अब आईटी पार्क स्थित आईटीडीए के बराबर में नई इमारत बनाई जा रही है। यह आईटीडीए का नया डाटा सेंटर होगा। यह अत्याधुनिक और ज्यादा सुरक्षित होगा। -

यूसीसी पोर्टल पर अब 30 हजार से अधिक यूजर्स कर सकेंगे एंट्री, ITDA की नई पहल
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का जो पोर्टल सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने तैयार किया है। उस पर एक साथ 30 हजार से ज्यादा यूजर भी अपनी एंट्री कर सकते हैं। अत्याधुनिक सुरक्षा उपायों से लैस इस वेबसाइट को साइबर हमलों से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नेशनल डाटा सेंटर से लिंक किया गया है। आईटीडीए ने यूसीसी वेबसाइट https://ucc.uk.gov.in/ की लांचिंग से पूर्व पुख्ता तैयारियां की हैं। किसी भी तरह की तकनीकी खामी को तत्काल दूर करने के लिए टेक्निकल हेल्प डेस्क बनाई गई है।
इस वेबसाइट को दो बार सिक्योरिटी ऑडिट किया जा चुका है। सोर्स कोड रिव्यू में सभी वर्तमान पैमानों पर वेबसाइट खरी उतरी है। आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि वेबसाइट को सुरक्षा की दृष्टि से नेशनल डाटा सेंटर पर होस्ट किया गया है। इससे वेबसाइट पर साइबर हमला होने की दशा में भी कोई नुकसान नहीं होगा। वेबसाइट की प्रोसेसिंग स्पीड काफी उच्च है। यानी एक बार प्रॉसेस करने के बाद बेहद कम समय के भीतर वह पूरा हो जाएगा।
यूजर ट्रायल सफल, 30 हजार प्रति सेकेंड से ऊपर का लोड
यूसीसी पोर्टल पर भविष्य में यूजर की संख्या बढ़ने के मद्देनजर आईटीडीए ने लोड टेस्टिंग की है। प्रति सेकेंड 30 हजार से ज्यादा यूजर भी रहेंगे तो वेबसाइट हैंग नहीं होगी। वहीं, डेमो यूजर आईडी बनाकर वेबसाइट को रन किया गया, जिसका ट्रायल सफल रहा है। -

उत्तराखंड में ड्रोन कॉरिडोर की योजना, ड्रोनों के ट्रैफिक प्रबंधन के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा
हाल में डीजीसीए से अनुमति मिलने के बाद आईटीडीए ने उत्तराखंड में ड्रोन पोर्ट और ड्रोन कॉरिडोर बनाने की कवायद शुरू कर दी है। इसके साथ ही ड्रोनों के ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी मानवरहित यातायात प्रबंधन सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
दरअसल, आईटीडीए ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ड्रोन के टेकऑफ, लैंडिंग और रखरखाव के लिए ड्रोन पोर्ट का डिजाइन बनाने, उसे विकसित करने और संचालित करने के लिए काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा, मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के लिए सुरक्षित और कुशल हवाई यातायात सुनिश्चित करने के लिए समर्पित ड्रोन कॉरिडोर की स्थापना, वास्तविक समय में ड्रोन संचालन की निगरानी और प्रबंधन के लिए मानव रहित यातायात प्रबंधन (यूटीएम) सॉफ्टवेयर को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल का कहना है कि सरकार ड्रोन के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के साथ ही वाणिज्यिक और सरकारी अनुप्रयोगों में ड्रोन के सुरक्षित व अनुकूलित उपयोग की दिशा में काम कर रही है। ड्रोन संबंधी सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए ही आईटीडीए ने ये शुरुआत की है, जिसके लिए विभिन्न रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) जारी की है। इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं को बुलाया गया है, जो अपना कॉन्सेप्ट आईटीडीए के सामने रखेंगे। इसी आधार पर निविदा की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।उत्तराखंड में ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए छह कॉरिडोर बनने जा रहे हैं। इनमें तीन गढ़वाल और तीन कुमाऊं में होंगे। ये सभी कॉरिडोर आपस में जुड़े हुए होंगे। इसके लिए डीजीसीए से अनुमति मिल चुकी है, इसलिए विशेषज्ञों की मदद से तैयार होने वाली कॉरिडोर से हवाई सेवाएं बाधित नहीं होंगी। समर्पित नेटवर्क तैयार होने के बाद गढ़वाल से कुमाऊं के बीच ड्रोन की आवाजाही भी संभव हो सकेगी।
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सचिव आईटी नितेश झा ने साइबर हमले के बाद डिजास्टर रिकवरी सेंटर शुरू किया, डाटा सुरक्षा पर जोर
सचिव आईटी नितेश झा ने बुधवार को साइबर हमले के बाद सचिवालय में तैयार किए गए निकटतम डिजास्टर रिकवरी सेंटर का शुभारंभ किया। इसमें न केवल संवेदनशील डाटा सहेजकर रखा जाएगा बल्कि सभी विभागों के डाटा की टेप भी फायरप्रूफ आलमारी में सुरक्षित रखी जाएंगी।
सचिव नितेश झा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य डाटा सेंटर की क्रिटिकल एप्लीकेशन और सेवाओं को किसी भी तकनीकी समस्या या आपदा के दौरान बिना किसी रुकावट सुचारू संचालित रखना है। उन्होंने टीम की प्रशंसा करते हुए इसे आईटी क्षेत्र में नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। कहा कि यह व्यवस्था भविष्य में किसी भी आपदा या तकनीकी समस्या के दौरान महत्वपूर्ण एप्लीकेशन सेवाओं को कम से कम समय में रिकवर कर दोबारा शुरू करने में सहायक होगी।
निदेशक आईटीडीए नितिका खंडेलवाल ने बताया कि निकटतम डिजास्टर रिकवरी साइट में डाटा सेंटर की महत्वपूर्ण एप्लीकेशन का छह माह तक का बैकअप उपलब्ध रहेगा। आईटीडीए ने इस सेटअप को सचिवालय स्थित स्वान पीओपी में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए बिना किसी अतिरिक्त लागत तैयार किया है। जबकि बाजार में इस प्रकार कि साइट डेवलपमेंट के काम की लागत करीब 20 करोड़ है।
डिजास्टर रिकवरी का यह काम एनआईसी निदेशक अरुण शर्मा की अध्यक्षता में गठित टीम ने पूरा कया है, जिसमें एजीएम मनवीर जोशी, प्रोजेक्ट मैनेजर राम, डाटाबेस विशेषज्ञ नितीश सैनी, नेटवर्क विशेषज्ञ विकास, बैकअप विशेषज्ञ गिरीश शामिल रहे। -

आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने दी जानकारी, एसडीसी अब पूरी तरह कार्यशील!
उत्तराखंड के सबसे बड़े साइबर हमले के 17 दिन बाद आईटीडीए का डाटा सेंटर पूर्ण रूप से बहाल हो गया है। आईटीडीए की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने बताया कि एसडीसी पूरी तरह से बहाल हो गया है। वह एप्लिकेशन जो लाइव नहीं चल रहे हैं या बंद हैं, उन्हें डेवलपर से हल कराएंगे।
कहा कि हमने आईटीडीए में नवीनतम मशीनें रखी हैं, जहां डेवलपर और एसडीसी टीम, दोनों साथ बैठकर एप व साइटें ठीक कर सकते हैं। हमने संबंधित विभागों को भी इसके बारे में सूचित कर दिया है।
वहीं, आईएफएमएस फाइनेंस डाटा सेंटर से काम कर रहा है। आपको बता दें कि तीन अक्तूबर को माकोप रैनसमवेयर का हमला होने के बाद प्रदेश की सभी आईटी सुविधाएं ठप हो गई थीं। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था।
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सीएम हेल्पलाइन पहले से सुचारू, नागरिकों को मिली राहत
स्टेट डाटा सेंटर में आए मालवेयर के कारण अस्थायी रूप से बंद की गई प्रमुख विभागों की वेबसाइटों को रविवार को सुचारू कर दिया गया है। आज अपनी सरकार, ई-,ऑफिस, ई-रवन्ना पोर्टल, चारधाम पंजीकरण जैसी मुख्य साइट को सुचारू कर दिया गया है। इससे पहले शनिवार को सीएम हेल्पलाइन को सुचारू कर दिया गया था।
गौरतलब है कि 2 अक्टूबर को स्टेट डाटा सेंटर में आए मालवेयर के कारण उत्तराखंड शासन की कई महत्वपूर्ण साइट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। शनिवार को राजस्थान से देहरादून लौटने के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एनआईसी, आईटीडीए, पुलिस विभाग आदि के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी। मुख्यमंत्री ने सोमवार तक सभी साइट्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए थे।
आईटीडीए की निदेशक निकिता खंडेलवाल ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में सभी प्रमुख साइट्स को आज सुचारू कर दिया गया है। उन्होंने अवगत कराया कि 5 अक्टूबर को सीएम हेल्पलाइन व स्टेट पोर्टल जैसी सुविधाएं सुचारू कर दी गयी थी। जबकि आज सभी सेवाएं मुख्यतः अपनी सरकार, ई ऑफिस, ई-रवन्ना पोर्टल, चारधाम रजिस्ट्रेशन सभी को सुचारू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी डाटा लॉस का कोई भी मामला संज्ञान में नहीं आया और सभी डाटा सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन में पिछले दो दिन में लगभग 2034 कॉल्स में से 1879 को वापस दर्ज कर लिया गया है। जिसमें लोगों को कॉल बैक किया गया और इसमें से 600 से अधिक शिकायतें दर्ज कर दी गई हैं।