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  • गुरु परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा अभियान, धार्मिक स्थलों का हो रहा विकास

    गुरु परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा अभियान, धार्मिक स्थलों का हो रहा विकास

    अयोध्या: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या पूरी तरह भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास में डूबी नजर आई। तड़के सुबह से ही हजारों श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों पर पहुंचने लगे, जहां उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पवित्र स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीरामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना की। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शहर के विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों में गुरु पूजन, भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में शिष्यों ने अपने गुरुजनों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

    सरयू घाटों पर दिनभर रही श्रद्धालुओं की भीड़

    गुरु पूर्णिमा के कारण अयोध्या के प्रमुख घाटों और मंदिरों में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों की टीमें प्रमुख धार्मिक स्थलों पर तैनात रहीं। भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन के अनुसार सरयू स्नान और दर्शन का क्रम पूरे दिन जारी रहा।

    गुरु परंपरा को बढ़ावा देने पर सरकार का विशेष फोकस

    प्रदेश सरकार भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंदिरों, आश्रमों और गुरुद्वारों का विकास किया जा रहा है ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिल सके। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और गुरु परंपरा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

    संतों और गुरुओं से जुड़े स्थलों का हो रहा विकास

    प्रदेश में महर्षि वेदव्यास, संत रविदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसी महान विभूतियों से जुड़े स्थलों को विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। महोबा के गोरखगिरि पर्वत पर लगभग 11.25 करोड़ रुपये की लागत से 51 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा गुरु गोरखनाथ की स्थापित की गई है। वहीं अमेठी के जायस में करीब 5.95 करोड़ रुपये की लागत से 25 फीट ऊंची योग मुद्रा में गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा का निर्माण कार्य जारी है।

    धार्मिक पर्यटन को मिल रहा नया स्वरूप

    वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर 51.54 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा देवरिया में ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 2.50 करोड़ रुपये की परियोजना पर कार्य चल रहा है। इसी क्रम में हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा के पर्यटन विकास के लिए 3.63 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित रविदास मंदिर के विकास के लिए 229.57 लाख रुपये की धनराशि मंजूर की गई है।

    पर्यटन मंत्री ने दिया यह संदेश

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संतों, महापुरुषों और गुरु परंपरा से जुड़े स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ वहां आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल रही है और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है।

  • उत्तराखंड में सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर : संत समाज

    उत्तराखंड में सनातन संस्कृति के संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर : संत समाज

    समाज को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व हिंदू परिषद पिछले छह दशकों से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि परिषद केवल एक संगठन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और राष्ट्र चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन का एक सशक्त माध्यम है, जिसने समाज को संगठित करने और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्तमान समय में देश और दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और मूल्यों से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी वर्गों से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देश निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्विकास और उज्जैन में महाकाल लोक जैसी परियोजनाओं ने देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इन कार्यों ने करोड़ों लोगों की आस्था को सम्मान देने के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती प्रदान की है।

    धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी राज्य को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। इसके तहत केदारखंड और मानसखंड क्षेत्रों में स्थित प्राचीन मंदिरों का पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। साथ ही हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर भी संरक्षित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है। समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अलावा सख्त भू-कानून लागू कर प्रदेश की भूमि, संस्कृति और जनहितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उद्देश्य विकास के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड की मूल पहचान सुरक्षित रूप में मिल सके।

    युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से भारतीय दर्शन, संस्कृति, इतिहास और सभ्यता से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है, जिसकी पहचान को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल से जुड़े संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को धर्मरक्षक, सनातन सेवा के लिए समर्पित तथा देवभूमि के देवालयों का सेवक बताते हुए संत समाज की ओर से आशीर्वाद प्रदान किया। महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वभर में सनातन संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।

    उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, लव जिहाद और भूमि अतिक्रमण जैसी चुनौतियों के विरुद्ध सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इन निर्णयों ने उत्तराखंड को सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। वहीं महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण सदियों की प्रतीक्षा का परिणाम है और यह भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

    संत समाज ने उत्तराखंड में तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखना समय की आवश्यकता है। उन्होंने देवभूमि के पौराणिक स्वरूप, सांस्कृतिक मानबिंदुओं और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए धामी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी राज्य सरकार इसी प्रकार दृढ़ता के साथ कार्य करती रहेगी।